तन्हाई और माशूका

करवटों से काम चले तो फिर सनम को पूछे कौन,
रात अगर यूँ कट जाए तो फिर ख़्वाबों को पूछे कौन।

सांसों की हल्की आहट में जब दिल बहल-सा जाता है,
धड़कन ही हमराज़ बने तो जज़्बातों को पूछे कौन।

नींद रूठी रहे मगर वो चाँद खिड़की पे ठहरा हो,
ऐसी तन्हा रातें हों तो मुलाक़ातों को पूछे कौन।

तकिए में सिमटी यादें जब ख़ुद ही गले लगाती हों,
बिन छुए ही मिल जाएँ तो एहसासों को पूछे कौन।

कुछ चेहरे दिल में बसते हैं, बिन दस्तक, बिन आवाज़,
वो यूँ घर में बस जाएँ तो मेहमानों को पूछे कौन।

हमने तो सीखा है यूँ तन्हाई से रिश्ता रखना,
जब ख़ुद से ही बात चले तो अफ़सानों को पूछे कौन।

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I am Ajay Bhadoo. IAS Officer, serving as Joint Secretary to the President of India.

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