रंग बदलते, रूप बदलते, भाव बदलते हरपल, जीवन के ही किस्से कहते आसमान के बादल । कभी ये नभ में उड़ते जाऐं बनके ऊंची पतंग, जैसे मन में जाग रही हो कोई नई उमंग । कभी देख सकते हो इनमे, शेर भालू या बंदर, कभी लगे ये भूत के साये प्रगटें अंदर के डर, कोई बादल श्वेत जोश में भंगड़ा करता है, कोई बोझिल श्याम रंग में सैड सांग गाता है । इनमे तुम जीवन के नए सपने बुन सकते …
Month: January 2022
ब्रह्मा विष्णु महेश मन की ये तीन शक्ति निज के ये तीन रूप अंतर के ये सर्वेश । भीतर छुपे ब्रह्मा से ही प्रेरित हुए नवविचार,नवसर्जन, नवयुग । फिर बीज को मैने विष्णु बनकर बरगद की तरह पनपाया, फैलाया । अब पत्तों को झड़ना है, जीवन धूप को ढलना है, मुझको शंकर बनना है । ब्रह्मा विष्णु महेश मन की ये तीन शक्ति निज के ये तीन रूप अंतर के ये सर्वेश ।।



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