कहानी

कहानी

जीवन बस एक कहानी, हम लिखते लम्हों की ज़ुबानी । चाहे वो वक़्त गुज़िश्ता हो , या चाहे आने वाला कल । भरपूर मिले वो लम्हे भी और मिल न सके वैसे भी पल। यादों, बातों, नातों के पल , कुछ चाह के पल, कुछ मोह के पल आशाओं और उम्मीदों के, नाकामी और निराशा के, कुछ लहरों जैसे हल्के पल, मस्ती के पल, फ़ुर्सत के पल । कुछ बोझिल मेरे ज़ेहन पर हैं, इक ठसक के पल इक कसक

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शहर

शहर

क्या शहर में भी कोई चेतना होती है ? किसे कहोगे शहर ? सड़कें, इमारतें, वाहनों के कोलाहल को, या फिर लोगों के मेले को- यंत्रवत,अपने-अपने कामों में लगे हुए लोग । क्या कोई जगह भी जीवंत हो सकती है ? कुछ अलग है अपने शहर में लौट के आना, निकट,सजीव, जीवन से भरपूर । जैसे पुराना दोस्त यूँ ही कहीं मिल जाए, जैसे गुज़रा समय, बिसरी बातें, बीते पल फ़िर सामने आ जाएं, निजी, भावपूर्ण, नॉस्टैल्जिक ! हाँ शहर

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About Me

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I am Ajay Bhadoo. IAS Officer, serving as Joint Secretary to the President of India.

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