जीवन बस एक कहानी, हम लिखते लम्हों की ज़ुबानी । चाहे वो वक़्त गुज़िश्ता हो , या चाहे आने वाला कल । भरपूर मिले वो लम्हे भी और मिल न सके वैसे भी पल। यादों, बातों, …
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क्या शहर में भी कोई चेतना होती है ? किसे कहोगे शहर ? सड़कें, इमारतें, वाहनों के कोलाहल को, या फिर लोगों के मेले को- यंत्रवत,अपने-अपने कामों में लगे हुए लोग । क्या कोई जगह भी …
रंग बदलते, रूप बदलते, भाव बदलते हरपल, जीवन के ही किस्से कहते आसमान के बादल । कभी ये नभ में उड़ते जाऐं बनके ऊंची पतंग, जैसे मन में जाग रही हो कोई नई उमंग । कभी …
ब्रह्मा विष्णु महेश मन की ये तीन शक्ति निज के ये तीन रूप अंतर के ये सर्वेश । भीतर छुपे ब्रह्मा से ही प्रेरित हुए नवविचार,नवसर्जन, नवयुग । फिर बीज को मैने विष्णु बनकर बरगद की …
कितने रूप बदलती है ये रात, कभी लम्बे सुनसान रस्तों की मौन रात्रि, तो कभी यादों और बातों का रतजगा लगा हो जैसे । कभी इतने अंधेरे के खुद को भी पहचान न सकूँ, तो कभी …
कभी कभी सोचता हूँ, कि क्या है सबसे पुरातन ? गाँव, शहर, बस्ती क्या प्राचीन हैं ? पिता, बन्धु-बान्धव, घर-परिवार, या फ़िर मित्रता ? किसको कहें हम पुराना ? कहाँ हैं हमारी जड़ें ? क्या है …

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