करवटों से काम चले तो फिर सनम को पूछे कौन, रात अगर यूँ कट जाए तो फिर ख़्वाबों को पूछे कौन। सांसों की हल्की आहट में जब दिल बहल-सा जाता है, धड़कन ही हमराज़ बने तो जज़्बातों को पूछे कौन। नींद रूठी रहे मगर वो चाँद खिड़की पे ठहरा हो, ऐसी तन्हा रातें हों तो मुलाक़ातों को पूछे कौन। तकिए में सिमटी यादें जब ख़ुद ही गले लगाती हों, बिन छुए ही मिल जाएँ तो एहसासों को पूछे कौन। कुछ …
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एक और एक मिलकर दो हुए, यह गणित की मिसाल है, एक और एक को मिलने न दें, यह कूटनीति की चाल है।। एक और एक जब ग्यारह बनें, यह …
जब शाम ढले, पर कोई राह न देखे, सुबह उजाले में, कोई संग ना चले। राहें खुली हों, मगर मंज़िलें धुंधली, कोई रोकने वाला न हो, न कोई संभाले। ख़्वाबों …
वाणी विष बन जाती अक्सर, सुनी सुनाई बात बेकार आँखें भी खेल करे हैं कभी इन सब में भरम के हैं आसार, तू अंतर मन में झांक ज़रा तेरे पास …
बरसों बरस – किसी जुस्तजू की तलाश में किसी आरजू की आस में किसी बदली की प्यास में किसी ख्वाब में या सराब में जिंदगी गुजार देने के बाद भी …








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