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तन्हाई और माशूका

करवटों से काम चले तो फिर सनम को पूछे कौन, रात अगर यूँ कट जाए तो फिर ख़्वाबों को पूछे कौन। सांसों की हल्की आहट में जब दिल बहल-सा जाता

गणित, प्रेम और क्रांति

गणित, प्रेम और क्रांति

एक और एक मिलकर दो हुए, यह गणित की मिसाल है, एक और एक को मिलने न दें, यह कूटनीति की चाल है।। एक और एक जब ग्यारह बनें, यह

आज़ादी या अकेलापन

आज़ादी या अकेलापन?

जब शाम ढले, पर कोई राह न देखे, सुबह उजाले में, कोई संग ना चले। राहें खुली हों, मगर मंज़िलें धुंधली, कोई रोकने वाला न हो, न कोई संभाले। ख़्वाबों

सफ़र

सफ़र

जाने-पहचाने और शांत रास्तों पर जब मैं चला, पैरों तले मिट्टी की नर्मी को महसूस किया। सामने वही बूढ़ा बरगद खड़ा था, टूटी टहनियों की आँखों में एक पहचान थी।

मौन और स्मित

मौन और स्मित

वाणी विष बन जाती अक्सर, सुनी सुनाई बात बेकार आँखें भी खेल करे हैं कभी इन सब में भरम के हैं आसार, तू अंतर मन में झांक ज़रा तेरे पास

मुश्किल-और-आसान

मुश्किल और आसान

बरसों बरस – किसी जुस्तजू की तलाश में किसी आरजू की आस में किसी बदली की प्यास में किसी ख्वाब में या सराब में जिंदगी गुजार देने के बाद भी

रसियन नाच

रसियन नाच

जब मेरी पत्नी सो रही हो, और जब बिटिया और उसकी आया सो रही हो । और जब सूर्य एक धुंध में चमकता सफेद गोला हो – चमकते पेड़ों के

कहानी

कहानी

जीवन बस एक कहानी, हम लिखते लम्हों की ज़ुबानी । चाहे वो वक़्त गुज़िश्ता हो , या चाहे आने वाला कल । भरपूर मिले वो लम्हे भी और मिल न

शहर

शहर

क्या शहर में भी कोई चेतना होती है ? किसे कहोगे शहर ? सड़कें, इमारतें, वाहनों के कोलाहल को, या फिर लोगों के मेले को- यंत्रवत,अपने-अपने कामों में लगे हुए

बादल

रंग बदलते, रूप बदलते, भाव बदलते हरपल, जीवन के ही किस्से कहते आसमान के बादल । कभी ये नभ में उड़ते जाऐं बनके ऊंची पतंग, जैसे मन में जाग रही

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About Me

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I am Ajay Bhadoo. IAS Officer, serving as Joint Secretary to the President of India.

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