करवटों से काम चले तो फिर सनम को पूछे कौन, रात अगर यूँ कट जाए तो फिर ख़्वाबों को पूछे कौन। सांसों की हल्की आहट …
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एक और एक मिलकर दो हुए, यह गणित की मिसाल है, एक और एक को मिलने न दें, यह कूटनीति की चाल है।। एक और …
जब शाम ढले, पर कोई राह न देखे, सुबह उजाले में, कोई संग ना चले। राहें खुली हों, मगर मंज़िलें धुंधली, कोई रोकने वाला न …
जाने-पहचाने और शांत रास्तों पर जब मैं चला, पैरों तले मिट्टी की नर्मी को महसूस किया। सामने वही बूढ़ा बरगद खड़ा था, टूटी टहनियों की …
वाणी विष बन जाती अक्सर, सुनी सुनाई बात बेकार आँखें भी खेल करे हैं कभी इन सब में भरम के हैं आसार, तू अंतर मन …
बरसों बरस – किसी जुस्तजू की तलाश में किसी आरजू की आस में किसी बदली की प्यास में किसी ख्वाब में या सराब में जिंदगी …
जब मेरी पत्नी सो रही हो, और जब बिटिया और उसकी आया सो रही हो । और जब सूर्य एक धुंध में चमकता सफेद गोला …
जीवन बस एक कहानी, हम लिखते लम्हों की ज़ुबानी । चाहे वो वक़्त गुज़िश्ता हो , या चाहे आने वाला कल । भरपूर मिले वो …
क्या शहर में भी कोई चेतना होती है ? किसे कहोगे शहर ? सड़कें, इमारतें, वाहनों के कोलाहल को, या फिर लोगों के मेले को- …
रंग बदलते, रूप बदलते, भाव बदलते हरपल, जीवन के ही किस्से कहते आसमान के बादल । कभी ये नभ में उड़ते जाऐं बनके ऊंची पतंग, …

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